चले आओ ...
शौक-ए-दीदार है चले आओ
ज़ख्म दरकार है चले आओ
बिन तुम्हारे धड़क नहीं सकता
दिल ये बीमार है चले आओ
लम्हा लम्हा तड़प रहा हूँ मैं
जीना दुस्वार है चले आओ
रौनकेन आपसे ही होती हैं
सुना संसार है चले आओ
आज कल इश्क़ की रियासत में
अपनी सरकार है चले आओ
बुझ रहे हैं चिराग़-ए-नज़रें 'अली'
शौक-ए-दीदार है चले आओ
Well said
ReplyDeleteshukriya janaab
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