उत्तराखंड
में पिछले 52 दिनों से चल रहे सियासी घमासान के बाद आज सुप्रीम कोर्ट के निर्देश
पर हरीश रावत को बहुमत साबित करने के लिए अपनी अग्नि परीक्षा देनी पड़ी और सियासी गलियारे
से ख़बरें आनी शुरू हो गई है की पहाड़ के चहेते 'हरदा' की अगुवाई में कांग्रेस
की जीत तय है अब महज़ औपचारिक तौर पर कल सुप्रीम कोर्ट में बंद लिफ़ाफ़े से नतीजे
खुलेंगे और ऐलान किया जाएगा।
किसी राज्य में राष्ट्रपति
शासन को अचानक से लगाया जाना वो भी महज़ एक दिन पहले जब मौजूदा सरकार को अपना विश्वास
साबित करना था यह लोकतंत्र में किसी आपदा से काम नहीं था। उत्तराखंड में उच्च
न्यायलय द्वारा राज्य से राष्ट्रपति शासन हटाया जाता है तो चंद घंटे बाद सर्वोच्च न्यायलय
फिर से राज्य को राष्ट्रपति के अधीन लाकर रख देता है। एक बार विश्वास मात के
के लिए राष्ट्रपति शाशन जो उम्मीद तह अब सर 24घंटे ही रहेगा। कल सुप्रीम
कोर्ट का फैसला आने के बाद राज्य में सरकार का गठन फिर से हो जायेगा। ऐसे कयास
लागए जा रहे हैं।
पिछले साढ़े सात सप्ताह
से उत्तराखंड की राजनीति में बहुत उथल पुथल देखनेको मिला । पहले सदन की कार्यवाही के दौरान कांग्रेस के ९ विधायक बाग़ी हो गए
और सरकार के खिलाफ चले गए तो अध्यक्ष ने उन सबकी सदस्यता रद्द करदी। ऐसे में आंकड़ा
विधान सभा का 70 से घटकर 61 हो गया और कांग्रेस के खाते में 36 में से अब 27 विधायक
बचे। फिर कोर्ट में मामला पहुंचा और राष्ट्रपति शासन का लगाया जाना और फिर विश्वास
मत पर राजनीतिक उठापटक। सब एक फ़िल्मी की स्क्रिप्ट की तरह ही थी।
आइए देखते हैं क्या हुआ
इन 52 दिनों में :-
Ø 18
मार्च: कांग्रेस के 36 विधायकों में से नौ बागी वित्त विधेयक पर मतदान के समय भारतीय
जनता पार्टी के विधायकों के साथ नजर आए। कांग्रेस के बागी विधायकों और भाजपा के 27
विधायकों ने राज्यपाल केके पॉल से मुलाकात की और हरीश रावत सरकार को भंग करने की मांग
की।
Ø 19
मार्च: मुख्यमंत्री रावत की राज्यपाल से मुलाकात और बहुमत होने का दावा। राज्यपाल ने
28 मार्च तक बहुमत साबित करने को कहा।
Ø 21
मार्च: कांग्रेस की बागियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू, पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा
के पुत्र साकेत बहुगुणा छह साल के लिए पार्टी से बाहर।
Ø 22
मार्च: कांग्रेस और भाजपा की राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मुलाकात। अमित शाह से दिल्ली
में मिले भाजपा विधायक।
Ø 26
मार्च: कांग्रेस के बागी विधायक हरक सिंह रावत ने एक कथित स्टिंग की सीडी जारी की और
मुख्यमंत्री हरीश रावत पर खरीद-फरोख्त का आरोप। हरीश रावत ने सीडी को भ्रामक प्रचार
बताया।
Ø 27
मार्च: शक्ति परीक्षण के ठीक एक दिन पहले राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू। कांग्रेस
के नौ बागी विधायक अयोग्य घोषित। केंद्र ने राज्य में दो सलाहाकार नियुक्त किए।
Ø 28
मार्च: राष्ट्रपति शासन को हाईकोर्ट में चुनौती, हरीश रावत का सरकार बनाने का दावा
पेश।
Ø 29
मार्च: नैतीताल हाईकोर्ट की एकल पीठ ने सदन में शक्ति परीक्षण का फैसला सुनाया, इसके
लिए 31 मार्च की तिथि तय।
Ø 30
मार्च: डबल बैंच ने शक्ति परीक्षण पर रोक लगाई। केंद्र ने उत्तराखंड में खर्च के लिए
अध्यादेश को दी मंजूरी।
Ø 01
अप्रेल: नैनीताल हाईकोर्ट ने केन्द्र को पांच अप्रेल तक जवाब देने को कहा।
Ø 07
अप्रेल: भाजपा के राज्य में सरकार बनाने के प्रयास पर हाईकोर्ट ने केन्द्र को चेताया।
Ø 18
अप्रेल: हाईकोर्ट की डबल बैंच ने केंद्र से पूछा उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन क्यों?
Ø 19
अप्रेल: कोर्ट की केन्द्र पर तल्ख टिप्पणी। कहा, यदि भ्रष्टाचार पर सरकार गिरने लगी
तो कोई भी सरकार कार्यकाल पूरा नहीं कर पाएगी
Ø 20
अप्रेल: कोर्ट ने कहा राष्ट्रपति भी गलत हो सकते हैं। उत्तराखंड की सियासत में भूचाल
लाने वाले पुलिस के घोड़े शक्तिमान की मौत।
Ø 21
अप्रेल: नैनीताल हाईकोर्ट ने राज्य में राष्ट्रपति शासन हटाया, 29 को बहुमत सिद्ध करने
के आदेश।
Ø 22
अप्रेल: सुप्रीम कोर्ट की नैनीताल हाईकोर्ट के फैसले पर 27 अप्रेल तक रोक, इस बीच हरीश
रावत ने 25 घंटे में दो कैबिनेट कीं और 15 बड़े फैसले लिए।
Ø 25
अप्रेल: उत्तराखंड पर संसद में संग्राम।
Ø 26
अप्रेल: राज्यसभा में भी हंगामा।
Ø 27
अप्रेल: सुप्रीम कोर्ट की शक्ति परीक्षण पर रोक, 29 अप्रेल को शक्ति परीक्षण नहीं होने
देने का फैसला सुनाया।
Ø 29
अप्रेल: हरीश रावत की स्टिंग सीडी की सीबीआई जांच का मामला।
Ø 03
मई: सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान राज्य में शक्ति परीक्षण के आसार जताए, केंद्र
से मांगा जवाब।
Ø 06
मई: सुप्रीम कोर्ट ने विधानसभा में 10 मई को फ्लोर टेस्ट का फैसला सुनाया।
Ø
09 मई: बागी विधायकों को विशवास मत डालने की अनुमति नहीं। बागी विधायकों ने सुप्रीम कोर्ट में दावा पेश किया, वहाँ से भी फटकार मिली ।
Ø 10 मई: उत्तराखंड विधान विशवास मत पूरा। सुप्रीम कोर्ट 11 मई को नतीजों का ऐलान करेगी।
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