Monday, 9 May 2016

न कोई अब्दुल हमीद होगा न कोई अब्दुल कलाम होगा

हमी को कातिल कहेगी दुनिया 
हमारा ही क़त्ल-ए-आम होगा 
हमी कुवें खोदते फिरेंगे 
हमी पे पानी हराम होगा 
यही ज़ेहनियत रही तो 
मुझे डर है इस सदी में 
न कोई अब्दुल हमीद होगा 
न कोई अब्दुल कलाम होगा 

.................'न मालूम'

2 comments:

  1. Late Meraj Faizabadi sahab ke sher hain ye

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  2. मेराज फैजाबादी का शेर है

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